Formula 1 के 2026 इंजन युग से पहले ही पावर वॉर तेज़ हो गई है। FIA ने आधिकारिक रूप से Mercedes और Red Bull Racing को एक बेहद स्मार्ट लेकिन नियमों के भीतर रहने वाली तकनीकी रणनीति अपनाने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद दोनों टीमें 2026 के नए हाइब्रिड पावर यूनिट्स में लगभग 13 हॉर्सपावर तक का फायदा हासिल कर सकती हैं—वो भी बिना किसी नियम उल्लंघन के।
यह फैसला सिर्फ एक टेक्निकल अपडेट नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में F1 की ताकत का संतुलन बदलने की क्षमता रखता है।
क्या है 2026 इंजन “loophole” की असल कहानी
2026 से Formula 1 में पूरी तरह नया पावर यूनिट नियम लागू होने जा रहा है। इसमें 100% सस्टेनेबल फ्यूल, ज़्यादा इलेक्ट्रिक पावर और बेहतर थर्मल एफिशिएंसी पर ज़ोर दिया गया है। आमतौर पर ऐसे नियम इंजन के compression ratio को सीमित रखते हैं ताकि विश्वसनीयता और लागत पर कंट्रोल रहे।
लेकिन FIA ने नियमों की व्याख्या करते हुए यह साफ कर दिया कि टीमें “real-world materials” यानी असल रोड-कार टेक्नोलॉजी से मिलती-जुलती एडवांस्ड मटीरियल्स का इस्तेमाल कर सकती हैं। इन हाई-ग्रेड एलॉय और मेटल्स की मदद से इंजन ज्यादा high compression पर काम कर सकता है, जिससे ज्यादा पावर और बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी मिलती है।
Mercedes और Red Bull ने इसी बिंदु को पकड़ लिया और अपने 2026 इंजन डिज़ाइन में इसे होमोलॉगेट करवा लिया।

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नियमों के भीतर रहकर नियमों को मात
इस पूरे मामले की सबसे दिलचस्प बात यही है कि यह किसी तरह की “cheating” नहीं है। FIA की मंज़ूरी के बाद यह पूरी तरह लीगल है। Red Bull के टीम प्रिंसिपल क्रिश्चियन हॉर्नर के शब्दों में, यह “नियमों के अंदर रहते हुए उन्हें मात देने” का उदाहरण है।
FIA के फैसले के बाद F1 पैडॉक में एक नई इंजन आर्म्स रेस शुरू होने की संभावना है, क्योंकि बाकी टीमें भी अब इसी तरह के समाधान खोजने में जुट जाएंगी—बशर्ते वे होमोलॉगेशन डेडलाइन से पहले ऐसा कर पाएं।
Mercedes के लिए वापसी का मौका
पिछले कुछ सीज़न में संघर्ष झेल चुकी Mercedes के लिए यह फैसला किसी लाइफलाइन से कम नहीं है। टीम का 2026 पावर यूनिट पहले ही थर्मल एफिशिएंसी के मामले में काफी मजबूत माना जा रहा था। हाई-कंप्रेशन तकनीक जुड़ने से इसे बिना ज्यादा फ्यूल खर्च किए अतिरिक्त पावर मिल जाएगी।
Mercedes इंजीनियरों ने पिस्टन, सिलेंडर और कंबशन चैंबर डिज़ाइन में इन एडवांस्ड मटीरियल्स का इस्तेमाल किया है। नतीजा यह कि 2026 में कुल आउटपुट भले ही 2025 से कम हो, लेकिन ड्राइवएबिलिटी और क्वालिफाइंग पेस बेहतर हो सकता है। सिमुलेशन के मुताबिक, कुछ ट्रैक्स पर 0.2 से 0.3 सेकंड प्रति लैप तक का फायदा मिल सकता है, जो आज के F1 में बहुत बड़ा अंतर है।
Red Bull और Max Verstappen की ताकत
Red Bull Powertrains के लिए यह और भी अहम है क्योंकि टीम Honda से अलग होकर अपने दम पर इंजन डेवलपमेंट के शुरुआती दौर में है। हाई-कंप्रेशन सेटअप से न सिर्फ ICE पावर बढ़ती है, बल्कि ERS का इस्तेमाल भी ज्यादा असरदार हो जाता है।
यह सेटअप Max Verstappen जैसे आक्रामक ड्राइवर के लिए बिल्कुल मुफीद माना जा रहा है। Red Bull के अंदरूनी आंकड़ों के अनुसार, इस बदलाव से करीब 5–7% तक की एफिशिएंसी बढ़त मिल सकती है, जो लंबे स्ट्रेट्स और ओवरटेकिंग के दौरान बड़ा फर्क पैदा करेगी।
Ferrari और Audi के लिए खतरे की घंटी
FIA के फैसले से सबसे ज्यादा दबाव Ferrari और Audi पर आ गया है। Ferrari ने अब तक ज्यादा कंजरवेटिव रास्ता अपनाया है, जिसमें इंजन की विश्वसनीयता को प्राथमिकता दी गई है। लेकिन 13 हॉर्सपावर की कमी 2026 के बेहद कड़े मुकाबले में भारी पड़ सकती है।
Audi, जो Sauber के जरिए F1 में एंट्री ले रही है, अभी अपने V6 पावर यूनिट को वैलिडेशन स्टेज में ही रखे हुए है। ऐसे में Mercedes और Red Bull की यह बढ़त उनके लिए चुनौती बन सकती है।

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2026 से F1 इंजन पूरी तरह बदल जाएंगे। V6 इंजन का साइज घटेगा, MGU-H हटेगा और MGU-K की पावर बढ़कर 350kW तक जाएगी। कुल आउटपुट करीब 1,000hp के आसपास होगा, जिसमें लगभग 50% हिस्सा इलेक्ट्रिक पावर का होगा। हाई-कंप्रेशन टेक्नोलॉजी इसी नए बैलेंस में ICE को ज्यादा असरदार बनाती है।
13 हॉर्सपावर सुनने में भले कम लगे, लेकिन F1 में यही अंतर पोल पोज़िशन और दूसरी पंक्ति के बीच का फैसला कर देता है। इसका मतलब ज्यादा ओवरटेकिंग, बेहतर स्ट्रेट-स्पीड और रणनीति में बड़ा बदलाव हो सकता है।
FIA की इस मंज़ूरी ने साफ कर दिया है कि 2026 का Formula 1 सीज़न सिर्फ नई कारों का नहीं, बल्कि नई सोच और स्मार्ट इंजीनियरिंग का भी होगा। Mercedes और Red Bull ने शुरुआती बढ़त बना ली है, जबकि Ferrari और Audi को अब तेज़ी से प्रतिक्रिया देनी होगी।
अब सवाल यही है—क्या यह पावर एडवांटेज 2026 में चैंपियनशिप का रुख बदल देगा, या F1 हमें एक बार फिर चौंका देगा?
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